परिचय

  • मुस्कान वह मनोहर चाबी है जो कि हर दरवाजे का ताला खोल सकती है.

जय श्री कृष्णा

राष्ट्रीय कथा वाचक संत शिरोमणि पं. प्रदीप जी मिश्रा का जन्म २६ जून १९७७ को सीहोर एम. पी. मे हुआ ! जिला सीहोर के रास्तों से अबाध गति से चलती यह भक्तिमय धारा शायद जानती भी नहीं थी की यह धारा उसे कहा पहुंचपाएगी ! बस यही पता था की कुछ क्र गुजरना है ! चुनोतियाँ तो घेर के बहार ही खड़ी थी , परन्तु पूर्व जन्मो के संस्कार गुरुदेव के सानिध्ये में ले आये, अब गुरु की वही आशीर्वाद को वही धारा सरिता बन चुकी है जो श्रीमद भगवत कथा के माध्यम से पुरे राष्ट्र को आद्ध्यात्म का स्नान करा रही है! पं. मिश्रा जी के भक्तिमय प्रवचन सुनने को उनका स्नेहील भक्त सदैव आतुर रहते है.पंडित जे को श्रीमद भागवत का ज्ञान उस समय प्राप्त हुआ जिस समय श्रीमती गीता बाई पाराशर ने श्रीमद भागवत पंडित जी के हाथों में दी |उन्हें के माध्यम से प्रथम भागवत श्री गोपीकिशन जी चाण्डक के यहां प्रारंभ हुए जहाँ से सीहोर की माताओं एवं पुरुषो के आत्मीय स्न्हे ने उन्हें एक लोकप्रिय व्यासपाठी बना दिया | श्रीमद भागवत के प्रवक्ता पं. प्रदीप जी मिश्रा इन् सबसे अद्धिक पूज्ये गुरुदेव श्री विठ्ठलेश जी महारज के कर्मठ ,निष्ठावान, शिष्य है , जिन्होंने शिस्य्तव को गरिमा प्रदान की | यहां संस्कार का ऐसा वृक्ष है जिसमे छाया के साथ फल देने के संस्कार भी घुट्टी में ही संजो लिए थे | पिता पं. श्री रामेस्वर जी मिश्रा ने अपने संस्कारो के जल से सींच कर इस पौधे को समाज , धर्म एवं संस्कृति की सेवा में समर्पित कर दिया | अब तक देश भर में सैंकड़ो , भव्य मंचो से लाखो भक्तों को अमृतपान करा चुके पंडित मिश्रा के मालवा -निमाड़ सहित उतर दक्षिण भारत में भी अनेकों शिष्य हैं और ये दायरा निरंतर वैटवृक्ष की तरह फैलता ही जा रहा है

पित्रशांती के उपाए

१)प्रातः भोजन के बनाते समय प्रथम में तबे पर कच्चे दूध का छीटा अवश्ये दे |

१)प्रातः भोजन के बनाते समय प्रथम में तबे पर कच्चे दूध का छीटा अवश्ये दे |

३) परिंडे के पास अमावस्या व् नवमी की तिथि को थोड़े चवल अवस्य रखे व् दूसरे दिन छत पर डाले

लक्ष्मी वृद्धि के उपाए

१)शुक्रवार को कमल गट्टे व् हल्दी की गाँठ लाल वस्त्र में रखकर कूंक सो व् घी का दीपक जलाकर पूजन करे व् दूसरे दिन उसे विसर्जन करें|

२)पीपल के वृक्ष के नीचे पूर्णिमा व् आमवस्या को चौमुखी घी का दीपक अवस्य लगाये

३)शिव मंदिर में हर महीने की शिवरात्रि पर घी का दीपक जलाये

गृह शांति के उपाए

१)हल्दी की गाँठ को हरे मुंग को साथ तुसली के कयारे के पास नाम व् गौत्र से गाँड़ दे ,शुक्रवार के केवल एक बार |

२)दसमी तिथि के ५ बार, सही मंदिर के जलाधारी में दूध का वेलपत्र डाले |

३)शीतला माता मंदिर में सिरे का भोग लगाये , चुतर्थ के केवल २ बार|

उत्तम विद्या का के उपाए

१) बैकुण्ठ चतुर्थदशी के शिवजी पर तुलसी व् ठाकुर जी पर बेलपत्र चढ़ाकर सहद के साथ रखे, १५ दिन बाद बच्चो के चटाये ||

श्री श्री श्री श्री श्री सरस्वत्यै माँ नमो नम: स्मरण करे रविवार को दोपहर १२.०० बजे अवस्य करें|

३)घर की माता के हाथ से बच्चो की मस्तक पर रोली तिलक विणा विणेश्वरी, सरस्वती का नाम लेकर अवस्य लगाये

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